कृषि विभाग की डायग्नोस्टिक टीम ने खेतों में जाकर फसलें देखी

त्रिमूर्ति न्यूज दीपक यादव
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कृषि विभाग की डायग्नोस्टिक टीम ने खेतों में जाकर फसलें देखी
हरदा-
खरीफ मौसम वर्ष 2023 में बोई गई फसले जो की वानस्पतिक अवस्था में है, विगत दिनो लगातार वर्षा एवं बादलयुक्त मौसम रहने से कीटो एवं व्याधी के प्रगुणन के लिए अनुकुल रहा है। विगत 3-4 दिनो से मौसम साफ हुआ है जिसके पश्चात कृषको द्वारा कीट व्याधी के नियंत्रण हेतु पौध संरक्षण औषधीयो का प्रयोग कर रहे है। कृषि वैज्ञानिको एवं कृषि प्रसार अधिकारीयों का संयुक्त रूप से डायग्नोस्टिक दल का गठन कर क्षेत्र का सर्विलियंस प्रारंभ कर दिया गया है, डायग्नोस्टिक टीम में सहायक संचालक कृषि सजय यादव कृषि वैज्ञानिक द्वय मुकेश बकोलिया एवं सर्वेश कुमार वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री विरेन्द्र साहू सम्मीलित थे। इसी क्रम में आज डायग्नोस्टिक टीम द्वारा सोडलपुर, झाडबीडा, पाडरमाटी, कासरनी, झाडपा, रैसलपुर, रहटगांव एवं विच्छापुर आदी ग्रामो का भ्रमण कर कृषकों के साथ सोयाबीन, उड़द एवं मक्का फसल का निरिक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि, सोयाबीन में सेमीलूपर एवं तम्बाकू इल्ली एवं कहीं कहीं हेलीकोवर्षा का प्रकोप देखा गया है, यह कीट पौधों की पत्तीयों को खाते है साथ ही फूल की कलीया फूल एवं फली में विकसित होते हुए दानो को खा जाते है। इनके नियंत्रण के लिए क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.8 एस.सी. की 60 मी.ली. मात्रा या इन्डोक्साकार्ब 15.8 इ.सी. की 135 मी.ली. मात्रा अथवा विचनालफॉस 25 ई.सी. की 600 मी.ली. मात्रा अथवा बीटासाइफ्लूथ्रीन 8.49ः एवं इमिडाक्लोप्रीड 19.8ः की 140 मी.ली. मात्रा का प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
उड़द फसल के निरीक्षण के दौरान कहीं कहीं यलोवेन मोजेक देखा गया, इसके नियंत्रण हेतु इस रोग के वाहक सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए क्विनालफॉस 25 ई.सी. की 600 मी.ली. मात्रा का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। मक्का फसल का निरक्षण किया गया, निरीक्षण के दौरान पाया गया कि खेत के दल भराव वाले हिस्से में फसल पीली पड़ गई है. इस हेतु कृषक भाई उचित जल निकास की व्यवस्था करे तथा एन.पी.के. 19-19-19 का 1 कि.ग्रा प्रति एकड की दर से छिड़काव करें।


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