राम मंदिर आंदोलन केवल मंदिर निर्माण के लिए ही नहीं बल्कि हिंदू समाज में सामाजिक समरसता तथा विश्वास के द्वारा एकात्मता का भाव निर्माण करने का भी अभूतपूर्व आंदोलन बना-श्री स्वांत रंजन

त्रिमूर्ति न्यूज दीपक यादव
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राम मंदिर आंदोलन केवल मंदिर निर्माण के लिए ही नहीं बल्कि हिंदू समाज में सामाजिक समरसता तथा विश्वास के द्वारा एकात्मता का भाव निर्माण करने का भी अभूतपूर्व आंदोलन बना-श्री स्वांत रंजन
टिमरनी 

नगर में विगत 2 दिनों से चल रही व्याख्यानमाला का आज तीसरा व अंतिम दिवस है। श्रद्धेय भाऊसाहेब भुस्कुटे स्मृति व्याख्यानमाला के अंतिम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख श्री स्वांत रंजन जी ने *राष्ट्रीय एकात्मता एवं राम मंदिर आंदोलन* विषय पर सुधी श्रोताओं के मध्य अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण जन-जन की चर्चा का विषय बना हुआ है ।माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद अब भव्य राम मंदिर निर्माण हो सके इस हेतु गांव ,नगर ,कस्बे ,महानगरों के सभी हिंदू परिवारों तक पहुंच कर एक व्यापक संपर्क अभियान के द्वारा धन संग्रह अभियान प्रारंभ हो चुका है। इस पवित्र कार्य में सभी हिंदू परिवारों का सहभाग हो सके इसके लिए ₹10 के कूपन से लेकर बड़ी से बड़ी राशि प्राप्त करने कार्यकर्ता घर- घर पहुंचेंगे। संपूर्ण देश में चला आंदोलन हम सभी के लिए गर्व का अनुभव कराता है। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा की 1528 में बाबर ने सम्राट विक्रमादित्य का कसौटी के पत्थरों से बना हुआ राम मंदिर तोड़कर उसके मलबे से एक ढांचा बनाने का प्रयास किया, लेकिन लगातार हिंदू संघर्षों के कारण वह मस्जिद नहीं बन पाई थी। उस स्थान पर मंदिर  निर्माण के लिए अब तक 76 युद्ध हुए । सन 1984 में दिल्ली में धर्म संसद व राम जन्मभूमि मुक्ति समिति का गठन हुआ जिसमें गैरकानूनी ताले को खुलवाने के लिए जन जागरण करने का निर्णय हुआ। सितंबर 1984 में राम जानकी रथ यात्रा निकाली गई। 1 फरवरी 1986 को अयोध्या जिला न्यायाधीश ने राम जन्मभूमि पर लगे ताले को खोलने का आदेश दिया। उसके पश्चात राम जन्मभूमि न्यास का गठन हुआ । परंतु तत्कालीन परिस्थितियां समाज में व्याप्त एकात्म भाव को खंडित करने वाली थी। दिल्ली में खालिस्तानी साजिश के तहत हिंसात्मक दंगों ने सिक्खों व हिंदुओं के मन में अविश्वास और संदेह पैदा किया तो वहीं आर्य और द्रविड़ के मुद्दों ने उत्तर व दक्षिण के लोगों में खाई पैदा करने का गलत कार्य किया । वहीं केंद्र सरकार के द्वारा अगड़े और पिछड़े के भाव को मान्यता देने के कारण, समाज में आपसी सौहार्द और सद्भाव को बड़ा धक्का लगा। तो वहीं
 तथाकथित सवर्णों के दुर्व्यवहार से दुखी लोग मतांतरित हुए। परंतु फिर भी आंदोलन प्रारंभ हुआ और गांव- गांव में शिला पूजन के लिए यात्राएं पहुंची जिसमें 2लाख75 हजार गांवों में 6 करोड़ लोगों ने इसमें अपनी सहभागिता दी। इस अभियान से समाज में पुनः एकात्मता का भाव जागृत हुआ।
1989 में विवादित जगह पर शिलान्यास कार्य प्रारंभ किया । *हिंदव:सोदरा सर्वे, न हिंदू पति तो भवेत्, मम दीक्षा हिंदू रक्षा मम मंत्र समानता* इस मंत्र को पुनः सार्थक करने की दृष्टि से समस्त संतों की उपस्थिति में बिहार के अनुसूचित जाति के श्री कामेश्वर चौपाल द्वारा वेद मंत्रों से अभिमंत्रित पहली शिला को रखा गया ।यह ऐतिहासिक कदम सामाजिक समरसता का था।
राम मंदिर आंदोलन केवल मंदिर निर्माण के लिए ही नहीं बल्कि हिंदू समाज में सामाजिक समरसता तथा विश्वास के द्वारा एकात्मता का भाव निर्माण करने का भी अभूतपूर्व आंदोलन बना। सन 1990 में रथ यात्रा ने व्यापक जन जागरण किया। इसी दौरान राम ज्योति घर- घर पहुंचाई गई जिसे संपूर्ण समाज ने सहर्ष स्वीकार किया। यह भी समाज को जोड़ने का विलक्षण प्रयत्न था l सन 1990 में की गई कारसेवा ने भी जाति - पाति, ऊंच-नीच ,उत्तर- दक्षिण का भेद भुला दिया था ।जातिगत दीवारें ढहा दी गई थी।
आंदोलन के चौथे चरण में फिर से एक बार जन जागरण करने के लिए, श्री राम चरणपादुका पूजन कार्यक्रम गांव- गांव में आयोजित किया गया ।अंत में लंबी कानूनी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को मंदिर निर्माण करने की अनुमति दीl वास्तव में मंदिर निर्माण से संपूर्ण समाज का संस्कार, दिशा, सामाजिक समरसता, समता का भाव जागृत होगाl मंदिर निर्माण में जाति, वर्ग ,प्रांत ,भाषा से ऊपर उठकर समाज के प्रत्येक घटक का योगदान सुनिश्चित होगा। आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  महामंडलेश्वर  पूज्य ओमकार दास जी महाराज थे तथा विभाग संघचालक माननीय धन्ना लाल जी दोगने एवं  धर्म जागरण के  प्रांत निधि प्रमुख  श्री राजेश जैन भी पूरे समय उपस्थित रहे l संचालन महेंद्र छलोत्रे ने किया तथा आभार डॉक्टर विवेक भुस्कुटे ने व्यक्त किया।कार्यक्रम के अंत में महामंडलेश्वर जी महाराज द्वारा उपस्थित कार सेवकों  जिनमें श्री अशोक जैन श्री शालिग्राम चंदेल श्री शीतल जैन श्री विजय राठौर का सम्मान किया गया । साथ ही दिवंगत कारसेवकों को भी संस्मरण के साथ याद किया एवं श्रद्धांजलि दी।

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