सात दिवसीय विज्ञान एवं गणित समागम कार्यक्रम हुआ प्रांरभ

त्रिमूर्ति न्यूज दीपक यादव
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            सात दिवसीय विज्ञान एवं गणित समागम कार्यक्रम का हुआ प्रारंभ

   सरस्वती शिशु मंदिर टिमरनी में सात दिवसीय "विज्ञान एवं गणित समागम" कार्यक्रम के प्रथम दिवस आयोजन  का उद्घाटन  सरस्वती वंदना से  हुआ l इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सरस्वती शिक्षा मंडल समिति टिमरनी के अध्यक्ष  सुधाकर  जोशी ने की l विशेष अतिथि के रूप में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त विज्ञान शिक्षक  उमेश  चौहान उपस्थित रहे  lकार्यक्रम में विशेष सहयोगी के रुप में मेधा  भुस्कुटे ,अखिल माहूले एवं प्रशिक्षक के रूप में पुणे से पधारे सेवानिवृत्त जिला विज्ञान अधिकारी  विट्ठल  रायगांवकर उपस्थित रहे l  उमेश चौहान ने अपने उद्घाटन  भाषण में विज्ञान का महत्व बताते हुए कहा की विज्ञान हमारे दैनिक जीवन में जागने से लेकर सोने तक जीवन भर चलता रहता हैl हमारी मां भी एक वैज्ञानिक ही है l उन्होंने कहा कि विज्ञान में प्रयोग करते समय परंपरागत साधनों की उपलब्धता नहीं होने पर साधनों के अभाव में प्रयोग नहीं रुकना चाहिए बल्कि उनके विकल्प खोजना चाहिए ,जैसे - जब दूध उबलता है तो संशी के लिए नहीं बैठे रहते बल्कि उसके विकल्प के रूप में कपड़े या कागज का भी उपयोग हम करते हैं l साइंस में विज्ञान की अनेक चीजें उपलब्ध नहीं है जिन्हें हमें खोजना चाहिए l साइंस पढ़ाना उद्देश्य होना चाहिए केवल लेबोरेटरी बनाना नहीं l लिटमस पेपर नहीं होने पर जायसोन के फूल से भी लिटमस पेपर तैयार किया जा सकता है  l बबूल के कांटे के अनेक प्रयोग  विज्ञान में किए गए हैं l इस प्रकार हमारी एक वैकल्पिक साइंस किट  हम तैयार कर सकते हैं l कार्यक्रम के प्रशिक्षक श्री रायगावकर  ने कहा कि हमें भविष्य में क्या बनना है यह हमें पता होना चाहिएl छोटी-छोटी चीजें जीवन का टर्निंग पॉइंट होते हैं l उन्होंने आगे कहा मुझे गर्व है कि मैं एक शिक्षक हूं l संस्कार जीवन में महत्वपूर्ण  होते हैं l माता-पिता को प्रणाम करना, उनका कहना मानना l मतलब हमारे शरीर की समस्त सेल्स को नियंत्रित करना है l इस प्रकार से अपने आप को नियंत्रित करके ही कलाम साहब जैसा बना जा सकता है l उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा किया गया अतिरिक्त अच्छा कार्य ईश्वर के पास रजिस्टर होता है ईश्वर किसी ना किसी रूप में हमें इसका फल निश्चित ही देता है l इस कार्यक्रम में  विषय की भूमिका रखते हुए श्रीमती मेधा विवेक जी भुस्कुटे ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी जो कार्य कर रहे हैं , वह वास्तव में यंग ही है l अतः हमें अपने अतिथियों से प्रेरणा लेकर पूरी ऊर्जा  से अपने कार्य को अपने लक्ष्य तक पहुंचाना चाहिए l प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रारंभ " इतनी शक्ति हमें देना दाता " गीत से हुआ l प्रशिक्षण के दौरान  आज  आचार्य - दीदियों ने  दृष्टि सातत्व एवं सी योर पीपल से संबंधित  मॉडलों का निर्माण किया l कार्यक्रम का संचालन आचार्य  रिंकू जी पवार ने व अतिथि परिचय अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी प्रवीण गौर ने किया l आभार विद्यालय के प्राचार्य विनोद बोरसे ने किया कार्यक्रम के अंत में आचार्य दीदियों ने अपने अनुभव सुनाए l

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