कहत कबीर सुनो भई साधो, कबीर रंग में रंगा नर्मदा तटलोकनृत्यों ने बिखेरी विविधता में एकता की छटा

त्रिमूर्ति न्यूज दीपक यादव
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कहत कबीर सुनो भई साधो, कबीर रंग में रंगा नर्मदा तट
लोकनृत्यों ने बिखेरी विविधता में एकता की छटा
       

हरदा भुआणा उत्सव के दूसरा दिन हरदावासियों की स्मृति में एक अविस्मरणीय दिन के रूप में अंकित हो गया। जहाँ एक ओर प्रदेश के प्रख्यात भजन गायक श्री प्रहलाद टिपाण्या ने कबीर गायन से वातावरण को भक्ति रंग में रंग दिया, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न प्रांतों के लोकनृत्यों ने कार्यक्रम में विविधता में एकता की छटा बिखेरी।
      नर्मदा तट पर जब श्री प्रहलाद टिपाण्या ने अपनी विशिष्ट मालवी शैली में संत कबीर के भजन गाए तो वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक हो गया। दर्शकों में अद्भुत ऊर्जा का संचार इस प्रस्तुति के माध्यम से हुआ। जीवन के लिए अमूल्य शिक्षा भी कबीर भजनों के माध्यम से प्राप्त हुई।
    सांस्कृतिक संध्या में विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने भुआणा उत्सव में विविधता में एकता की छटा बिखेरी। राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति को दर्शकों ने बहुत पसंद किया। गुजरात की राठवा जनजाति के राठ नृत्य में कलाकारों के हैरतअंगेज करतबों ने दर्शकों को हतप्रभ कर दिया।

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