माता-पिता से बढ़कर दूसरा कोई शुभचिंतक नहीं-शिरोमणि दुबे

त्रिमूर्ति न्यूज दीपक यादव
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माता-पिता से बढ़कर दूसरा कोई शुभचिंतक नहीं-शिरोमणि दुबे                  
टिमरनी
गुर्जर छात्रावास टिमरनी  में आयोजित श्री राम कथा में प्रवचन के चतुर्थ दिवस पर भगवान श्री राम और भगवती सीता जी के पावन चरित्र का वर्णन करते हुए देवी जी ने कहा कि नारी समाज की सबसे बड़ी आदर्श है। श्री जानकी जी आज कन्याओं को श्री जानकी जी का आदर्श जीवन में उतारना चाहिए। परंतु दुर्भाग्य है हमारा कि आज तथाकथित नारी स्वातंत्र युग में कन्याएं मोबाइल फोन और व्हाट्सएप का दुरुपयोग करके अपनी मर्यादा भूल रही है जिसका परिणाम माता-पिता को भोगना पड़ता है। श्री जानकी जी जब पुष्प वाटिका में भगवान श्रीराम का दर्शन करती है और अंबा गौरी से प्रार्थना करके पुनः वापस लोड जाती है उस समय गांधार भी विवाह करने की प्रथा थी चाहती तो सीता जी विवाह कर सकती थी। परंतु मर्यादा का पालन किया भगवती जानकी जी ने और अपने आप को पिता के बस में समझा और लोड करके आ जाती है यह है मर्यादा। क्योंकि जब कन्या कुंवारी रहती है तब पिता के संरक्षण में रहती है विवाह के पश्चात पति के संरक्षण में रहती है। वृद्धावस्था में पुत्र के संरक्षण में रहती है भगवती सीता कुंवारी है स्वयं को पिता के संरक्षण में समझा और वापस लौट के आ जाती है एवं उत्कृष्ट मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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