कलेक्टर ने की खेतों में नरवाई नही जलाने की अपील
कलेक्टर श्री एस. विश्वनाथन ने जिले के किसान भाईयों से अपील की है कि वे गेहूँ कटने के बाद बचे हुए फसल अवशेष (नरवाई) खेतों में न जलाएं, क्योंकि यह खेती के लिए आत्मघाती कदम है। नरवाई में आग अलगाने से भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त हो जाती है। भूमि में उपस्थित सूक्ष्मजीव जलकर नष्ट हो जाते हैं, सूक्ष्म जीवों के नष्ट होने के फलस्वरूप जैविक खाद का निर्माण बंद हो जाता है। भूमि की ऊपरी परत में ही पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, आग लगने के कारण पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। नरवाई जलाने से भूमि कठोर हो जाती है, जिसके कारण भूमि की जल धारण क्षमता कम हो जाती है और फसलें सूख जाती है। खेत की सीमा पर लगे पेड़ पौधे आदि जलकर नष्ट हो जाते हैं। पर्यावरण प्रदूषित होता है, वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है, इससे धरती गर्म हो जाती है। कार्बन से नाइट्रोजन तथा फास्फोरस का अनुपात कम हो जाता है। केंचुए नष्ट हो जाते हैं, जिस कारण भूमि की उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है। उन्होने बताया कि वर्तमान में रबी फसलें जैसे गेहूँ, चना की कटाई करने के बाद किसान उसे जला रहे है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णय अनुसार नरवाई जलाने से पर्यावरण खराब हो रहा है। साथ ही जन-धन को नुकसान होने की संभावना बनी रहती है। मित्र कीट भी नष्ट हो रहे है। उन्होने किसानों से नरवाई न जलाते हुए उन्हें कृषि यंत्र स्ट्रारिपर से कटाई करके भूसा तैयार कर गहरी जुताई करने की सलाह दी है। श्री विश्वनाथन साफ तौर पर कहा कहा कि खेतों में नरवाई जलाने पर कठोर कार्यवाही की जाएगी।