देश में एक बौध्दिक संघर्ष चल रहा है जो भारतीय सोच रखने वाले लोगों के बीच है , एक पक्ष धर्म पक्षधर है तो दूसरा विरोधी -जे. नन्दकुमार

त्रिमूर्ति न्यूज दीपक यादव
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टिमरनीः-
देश में एक बौध्दिक संघर्ष चल रहा है जो भारतीय सोच रखने वाले लोगों के बीच है । एक पक्ष धर्म पक्षधर है तो दूसरा विरोधी यहां बात अखिल भारतीय संयोजक प्रज्ञा प्रवाह श्री जे. नन्दकुमार ने आयोजित श्रध्देय भाऊ साहब भुस्कुटे स्मिृति व्याख्यान माला के दूसरे दिन शहरी नक्सलवाद विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहि । उन्होने कहा कि शहरी नक्सलवाद पुर्व में घटित घटना के बाद सामने आए । प्रकाश करात और सीताराम योचुरी जैसे लोग जे.एन.यू. की देन है । ज.एन.यू. में आयोजित सांस्कृतिक संध्या के देश विरोधी नारे लगाये गए ।भारत के टुकड़े करने और अफजल के कातिलों के जिन्दा होने पर शर्मिंदा होने वाले लोग इस जे.एन.यू. की देन है। नक्सली जंगलों में रहते है लेकिन कुछ प्रोफेसर, पत्रकार और बुद्धिजीवी जो शहरों में रहते है और जे.एन.यू. के मामले की वकालत करते हे। ये शहरी नक्सलवादी है जो भारत के टुकडे करना चाहते है। इसके पीछे एक षडयंत्र है। इनमें अवार्ड वापस करने वालों की जमात भी शामिल है। इनका उद्देष्य संस्कृति कला और साहित्य का मुखौटा लगाकर भारत को तोड़ने का षडयंत्र करना है। भीमा कोरेगांव की घटना को देश और दुनिया के सामने गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाले भी यही शहरी नक्सलवादी है। में लोग बंदूक उठाकर जंगल में रहने वाले नक्सलवादियों से कहीं अधिक खतरनाक है। इनकी गतिविधियाँ भाषा और व्यवहार से इनकी पहचान की जा सकती है। कम्यूनिस्ट मानते है कि भारत कभी भी एक राष्ट्र नही था। नही है, नहीं हो सकता। यह अनेक देषों का एक समूह है। नेहरू जी ने भी उनके स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा कि भारत निर्माण की प्रक्रिया में है। इस लिए कह सकते है कि देष का पहला शहरी नक्सलवादी जवाहरलाल नेहरू थे। ये मानते है कि 1857 का आंदोलन स्वतंत्रता के लिए नहीं था। भारत के लोग जातियों में बंटे हुए अनपढ़ लोग है। कम्यूनिट शहरी नक्सलवादी भारत के टुकडे करने षडयंत्र में लगे है। कांग्रेस के लोग कम्यूनिस्ट विचार को आगे बढ़ा रहे है। एक भारत विरोधी वैचारिक माहौल बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है। शहरी नक्सलवाद देष की एकता के लिए एक बड़ा खतरा है। इनका उद्देष्य भारत के टुकडे करने के लिए जातिगत संघर्ष को बढ़ाना है। डाॅ. अम्बेडकर ने बामपंथियों और समाजवादियों को संविधान विरोधी बताया था। उन्हे अराजकता के व्याकरण कहा था। इन्हे जितनी जल्दी भारत से बाहर भेजा जाए उतना ही हमारे लिए अच्छा होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करेली से पधारे साहित्यकार श्री विनोद विष्वकर्मा ने किया । अतिथियों का स्वागत श्री राजेष जैन ने किया तथा परिचय रमेष दीक्षित एवं डाॅ. विवके भुस्कुटे ने किया । प्रारंभ में नर्मदाष्टक का गान हुआ । श्री प्रवीण सोनी ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया । इस अवसर टिमरनी, हरदा और आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे । वंदेमातरम् के गान के साथ दूसरे दिन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ ।

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