केवल अपनी मां ही राष्ट्र नहीं होती अपितु राष्ट्र ही अपनी मां होती है -श्री अडोनी

त्रिमूर्ति न्यूज दीपक यादव
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टिमरनी
संस्कार भारती विदर्भ प्रांत के महामंत्री एवं प्रसिध्द वक्ता श्री आशुतोष अड़ोनी ने कहा कि केवल अपनी मां ही राष्ट्र नहीं होती अपितु राष्ट्र ही अपनी मां होती है । वे टिमरनी में आयोजित श्रध्देय भाऊ साहब भुस्कुटे स्मृति व्याख्यान माला के 26 वें वार्षिक आयोजन के दूसरे दिन “मनुष्य तू बड़ा महान है ” विषय पर अपना उद्बोधन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि दो हजार वर्षों के सतत आकृमणों के बाद भी हमारी संस्कृति का प्रवाह युगानुकूल परिवर्तनों को स्वीकार करते हुए आज भी निरंतर है । यह संस्कृति की धारा किसी राजनैतिक सत्ता की प्राप्ति के लिए नहीं रहा । इस संस्कृति को बचाकर रखने वाले इस देश का सामान्य व्यक्ति था सामान्य व्यक्ति जब किसी बात को मन में ठान लेता है । तो उसके संकल्प से औरंगजेब की शक्तिशाली सेना को भी परास्त होना पड़ता है । चीन में अभिव्यक्ति की आजादी के लिए हुए संघर्ष में शामिल होने वाले और जान गंवाने वाले चीन के सामान्य परिवारों के बच्चे थे ।
श्री आशुतोष ने कहा कि जब - जब राष्ट्र के लिए समर्पण का अवसर आया, जब - जब चुनौती स्वीकार करने का अवसर आया तब - तब बड़े - बड़े बुध्दिजीवी सत्ता के सामने आत्म समर्पण का कर पीछे हट गए तब इस देश के सामान्य जन ने राष्ट्र के लिए चुनौतियों को स्वीकार किया । ह्वेनसांग के चाचा वृतांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह बहुमूल्य ग्रंथों को बचाने के लिए सामान्य लोगों ने स्वयं ब्रह्मपुत्र में जल समाधि ले ली । पन्ना धाय का महान योगदान कौन भूल सकता है । राष्ट्र द्रोह की परंपरा बड़े लोगों की रही है । सामान्य जन की नहीं । सामान्य जन के पुरूषार्थ और पराक्रम की गाथाओं से हमारा इतिहास भरा पड़ा है । जिनके कारण हमारी महान संस्कृति और परंपरा आज तक बची है । भारत महलों में नहीं झोपड़ियों में बसता है । इस देश में एक चेतना विद्यमान है जिसने इस देश को एक सूत्र में जोड़कर रखा है और वह चेतना है हिन्दुत्व । 

दुर्भाग्य से डेढ़ सौ वर्ष पूर्व पश्चिम से सत्ता केन्द्रित समाज की अवधारणा इस देश में आई जिसके कारण सत्ता के सामने याचना करने वाले पैदा होने लगे । स्वामी विवेकानन्द ने देश के सामान्य जन की चेतना को झकझोरा और कहा कि तू महान है तू ही इस समाज की धारना को बचा सकता है । कार्यक्रम की अध्यक्षता म,प्र, स्वणकार समाज के अध्यक्ष श्री अनिल सोनी ने की तथा संचालन राजेश जैन ने किया। अतिथियों का स्वागत श्री राम भुस्कुटे ने किया तथा श्री उमेश चैहान ने आभार व्यक्त किया । कु. सोनू गौर ,कु. स्निग्धा भुस्कुटे और साथियों ने नर्मदाष्टक, गीत और वंदेमातरम् प्रस्तुत किया । 

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