श्रद्धेय भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति व्याख्यानमाला का गौरवशाली 34वां आयोजन
टिमरनी नि.प्र.-
भारत की सनातन संस्कृति में विश्व कल्याण की भावना सदैव सर्वोपरि रही है। बड़े हित के लिए छोटे हित का त्याग करना हमारी परंपरा रही है। भारत को उसकी आत्मा से जोड़कर रखने का कार्य साधु-संतों, ऋषि-मुनियों और सज्जन शक्तियों ने हर काल में किया है। आज भी समाज की सभी समस्याओं का समाधान मूल्य आधारित जागृत एवं संगठित समाज में ही निहित है।
यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री दीपक विसपुते ने व्यक्त किए। वे शुक्रवार रात्रि सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित श्रद्धेय भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति व्याख्यानमाला के 34वें आयोजन में “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जागृत समाज की भूमिका” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
श्री विसपुते ने कहा कि भारत ने सदियों से आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना किया है, जिनका मुकाबला जागृत और संगठित समाज ने ही किया। रामायण काल से लेकर शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप तक, इतिहास इस बात का साक्षी है कि संगठित समाज ने ही आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि भारत कभी आध्यात्मिक, आर्थिक और सामरिक रूप से समृद्ध राष्ट्र रहा है। इन्हीं मूल्यों को पुनः जागृत करने के उद्देश्य से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। संघ की दैनिक शाखा केवल खेल गतिविधि नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना का केंद्र है।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राहुल खोरे, तनय सितोरे एवं पवन श्यामसुंदर गुर्जर को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री जगदीश बाजुलिया ने की। मुख्य वक्ता एवं अध्यक्ष का स्वागत श्री राम भुस्कुटे द्वारा पुष्पहार पहनाकर किया गया।स्तुति, गीत एवं वंदेमातरम् की भावपूर्ण प्रस्तुति बहिन स्निग्धा भुस्कुटे, पूजा पारे एवं साथियों ने दी।