बाल सुरक्षा के लिए सेहत की दस्तक:घर-घर तक
दस्तक अभियान 10 जून से 5 वर्ष तक के बच्चों को मिलेगा सुरक्षा कवच
जिले में वर्ष 2019-20 के लिए दस्तक अभियान के प्रथम चरण का आयोजन 10 जून से 20 जुलाई तक किया जाना है। पूर्व की भांति अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त दल (एएनएम, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) द्वारा 5 वर्ष से छोटे उम्र के बच्चों वाले परिवारों के घर पर स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की दस्तक दी जाकर बच्चों में प्राय: पाई जाने वाली बीमारियों की सक्रिय पहचान एवं उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में प्रमुख बाल्यकालीन बीमारियों की सामुदायिक स्तर पर सक्रिय पहचान कर त्वरित प्रबंधन करना है ताकि बाल मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
इस संबंध में आयोजित बैठक कलेक्टर श्री एस विश्वनाथन बोले कि हरदा में चिन्हित 78 हजार में से एक भी बच्चा अभियान के लाभ से वंचित ना रहे। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गांव में पदस्थ एएनएम, आशा कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के संयुक्त दल सभी गांवों में घर-घर जाकर 5 वर्ष तक के बच्चों में गंभीर कुपोषण, एनीमिया, निमोनिया, दस्त रोग की पहचान, एसएनसीयू व एनआरसी से छुट्टी प्राप्त बच्चों का फालोअप भी करें। बच्चों में जन्मजात विकृति की पहचान की जाए। अभियान के तहत बालपन से व्याप्त गंभीर बीमारियों की जांच कर उपचार कराया जाएगा। जिले की सभी ग्राम पंचायतों के लिए कुल 21 नोडल अधिकारी मॉनिटरिंग के लिए तैनात रहेंगे। सुबह गांव में घर घर संपर्क किया जाएगा उसके बाद शाम को आयोजित ग्राम सभा में छूटे बच्चों के बारे में पड़ताल कर उन्हें भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
कलेक्टर ने जिले में दस्तक अभियान को सामुदायिक सहभागिता के आधार पर प्रभावी क्रियान्वयन और अभियान के वास्तविक आंकड़े ही प्रदर्शित करने के निर्देश दिये ।बैठक में सीईओ श्री लोकेश कुमार जांगिड़ मौजूद थे।कलेक्टर ने कहा कि अभियान की सफलता उसके समस्त हितधारक की जागरुकता और उनकी सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करती है। इस अभियान के माध्यम से बाल मृत्युदर में वांछित कमी लाई जा सकती है। बच्चों में जन्मजात विकृतियां सहित अन्य बीमारियों की पहचान कर उनका निवारण किया जा सकता है। बच्चों को सही पोषण मिले, समुचित विकास हो, समय पर चिकित्सीय सुविधा मिले, यह हम सबकी जिम्मेदारी है। कलेक्टर ने पिछले दस्तक अभियान की रिपोर्टिंग में डायरिया, निमोनिया के अत्यंत अल्प आंकड़ों पर स्वास्थ्य अधिकारियों से लेते हुये सख्त हिदायत दी कि दस्तक के आंकड़ों में गंभीरता पूर्वक वास्तविक आंकड़े ही दर्ज किये जायें ताकि वास्तविक स्थिति जानकर उसके निदान और सुधार के उपाय किये जा सकें। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि दस्तक एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों का गंभीरता पूर्वक प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये।
सीएमएचओ डॉ प्रदीप मोजेस ने जिले में दस्तक अभियान की कार्ययोजना प्रस्तुत की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि समुदाय में बीमार नवजातों और बच्चों की पहचान प्रबंधन, रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के शैशव व बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान व रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के बीमार गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान, एनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग, दस्तरोग के नियंत्रण के लिये ओआरएस व जिंक का उपयोग संबंधी जागरुकता को बढ़ावा, प्रत्येक घर में ओआरएस पहुंचाना, 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए का अनुपूरण, बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों की पहचान, 2 वर्ष तक आयु वाले बच्चों की माताओं को समुचित शिशु व बाल आहार पूर्ति संबंधी समझाईश देने की कार्यवाहियां दस्तक अभियान के दौरान की जायेंगी।
दस्तक अभियान 10 जून से 5 वर्ष तक के बच्चों को मिलेगा सुरक्षा कवच
जिले में वर्ष 2019-20 के लिए दस्तक अभियान के प्रथम चरण का आयोजन 10 जून से 20 जुलाई तक किया जाना है। पूर्व की भांति अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त दल (एएनएम, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) द्वारा 5 वर्ष से छोटे उम्र के बच्चों वाले परिवारों के घर पर स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की दस्तक दी जाकर बच्चों में प्राय: पाई जाने वाली बीमारियों की सक्रिय पहचान एवं उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में प्रमुख बाल्यकालीन बीमारियों की सामुदायिक स्तर पर सक्रिय पहचान कर त्वरित प्रबंधन करना है ताकि बाल मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
इस संबंध में आयोजित बैठक कलेक्टर श्री एस विश्वनाथन बोले कि हरदा में चिन्हित 78 हजार में से एक भी बच्चा अभियान के लाभ से वंचित ना रहे। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गांव में पदस्थ एएनएम, आशा कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के संयुक्त दल सभी गांवों में घर-घर जाकर 5 वर्ष तक के बच्चों में गंभीर कुपोषण, एनीमिया, निमोनिया, दस्त रोग की पहचान, एसएनसीयू व एनआरसी से छुट्टी प्राप्त बच्चों का फालोअप भी करें। बच्चों में जन्मजात विकृति की पहचान की जाए। अभियान के तहत बालपन से व्याप्त गंभीर बीमारियों की जांच कर उपचार कराया जाएगा। जिले की सभी ग्राम पंचायतों के लिए कुल 21 नोडल अधिकारी मॉनिटरिंग के लिए तैनात रहेंगे। सुबह गांव में घर घर संपर्क किया जाएगा उसके बाद शाम को आयोजित ग्राम सभा में छूटे बच्चों के बारे में पड़ताल कर उन्हें भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
कलेक्टर ने जिले में दस्तक अभियान को सामुदायिक सहभागिता के आधार पर प्रभावी क्रियान्वयन और अभियान के वास्तविक आंकड़े ही प्रदर्शित करने के निर्देश दिये ।बैठक में सीईओ श्री लोकेश कुमार जांगिड़ मौजूद थे।कलेक्टर ने कहा कि अभियान की सफलता उसके समस्त हितधारक की जागरुकता और उनकी सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करती है। इस अभियान के माध्यम से बाल मृत्युदर में वांछित कमी लाई जा सकती है। बच्चों में जन्मजात विकृतियां सहित अन्य बीमारियों की पहचान कर उनका निवारण किया जा सकता है। बच्चों को सही पोषण मिले, समुचित विकास हो, समय पर चिकित्सीय सुविधा मिले, यह हम सबकी जिम्मेदारी है। कलेक्टर ने पिछले दस्तक अभियान की रिपोर्टिंग में डायरिया, निमोनिया के अत्यंत अल्प आंकड़ों पर स्वास्थ्य अधिकारियों से लेते हुये सख्त हिदायत दी कि दस्तक के आंकड़ों में गंभीरता पूर्वक वास्तविक आंकड़े ही दर्ज किये जायें ताकि वास्तविक स्थिति जानकर उसके निदान और सुधार के उपाय किये जा सकें। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि दस्तक एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों का गंभीरता पूर्वक प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये।
सीएमएचओ डॉ प्रदीप मोजेस ने जिले में दस्तक अभियान की कार्ययोजना प्रस्तुत की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि समुदाय में बीमार नवजातों और बच्चों की पहचान प्रबंधन, रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के शैशव व बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान व रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के बीमार गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान, एनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग, दस्तरोग के नियंत्रण के लिये ओआरएस व जिंक का उपयोग संबंधी जागरुकता को बढ़ावा, प्रत्येक घर में ओआरएस पहुंचाना, 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए का अनुपूरण, बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों की पहचान, 2 वर्ष तक आयु वाले बच्चों की माताओं को समुचित शिशु व बाल आहार पूर्ति संबंधी समझाईश देने की कार्यवाहियां दस्तक अभियान के दौरान की जायेंगी।
