परीक्षण रिपोर्ट मे हेपेटाईटिस ई होने की हुई पुष्टि
भोपाल भेजे गये थे कुछ सैंपल
टिमरनी
नगरीय क्षेत्र के वार्ड नम्बर 08, 09, 10 एवं 11 मे पीलिया के रोगी पाए गये हैं, जिनका उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मे किया जा रहा है । नगर के विभिन्न वार्डों से सेम्पल के तौर पर चार मरीजों के खून व मल के नमूने विशेष परीक्षण हेतु गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को भेजे गए थे। वहां से रिपोर्ट आने पर इन सभी मरीजों मे हेपेटाईटिस ई होने की पुष्टि की गई है।
स्वच्छता का रखे विशेष ध्यान
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ एम के चौरे ने बताया की हेपेटाईटिस-ई दूषित जल से होने वाला एक संक्रामक रोग है जो कि सावधानी बरतने पर सामान्य तौर पर २ से ३ सप्ताह मे ठीक हो जाता है। इस दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ख्याल रखना होगा. भोजन के पहले और शौच के बाद सही ढंग से हाथ धोना बहुत ज़रूरी है. असावधानी रखने से परिवार के अन्य सदस्य और आसपास के लोग भी रोग की चपेट मे आ सकते है।वर्तमान मे नगर के लगभग ४० मरीजों का उपचार चल रहा है. स्वास्थ्य विभाग और नगर पंचायत के संयुक्त प्रयासों से स्थिति अभी नियंत्रण मे है । स्वास्थ्य दल नियमित रूप से इन वार्डों मे सर्वेक्षण कार्य कर पीलिया के मरीजों को चिन्हित कर उन्हें चिकित्सालय भेज रहे हैं साथ ही वार्डवासियों को स्वास्थ्य शिक्षा देते हुए जागरूक भी कर रहे है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रदीप मोजेस के निर्देश अनुसार मरीजो की जांच परीक्षण व आवश्यक दवाओं की उपलब्धता टिमरनी चिकित्सालय मे सुनिश्चित की गई है।
*हेपेटाइटिस ई क्या है ?*
हेपेटाइटिस ई एक वायरस है, जो लीवर को संक्रमित करता है। हालांकि हेपेटाइटिस के अन्य रूपों के विपरीत, हेपेटाइटिस ई वायरस लंबे समय तक बीमारी या गंभीर लीवर की क्षति नहीं करता है, और अधिकांश लोग कुछ महीनों के भीतर ठीक भी हो जाते हैं। हेपेटाइटिस-ई लीवर की बीमारी है, जो हेपेटाइटिस ई वायरस (HEV) के कारण होता है ।
*हेपेटाइटिस ई कैसे फैलता है?*
हेपेटाइटिस ई एक जल जनित रोग है और इसके व्यापक प्रकोप का कारण दूषित पानी या भोजन की आपूर्ति है। प्रदूषित पानी इस महामारी को बढ़ा देता है।
*हेपेटाइटिस ई के लक्षण क्या है ?*
हेपेटाइटिस ई के लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते है। वायरस के संपर्क में आने के 2 से 7 सप्तााह के बाद ही कोई लक्षण दिखाई देता है। लक्षण आमतौर पर बाद के 2 महीनों में दिखाई देते हैं। आमतौर पर हेपेटाइटिस ई के लक्षणों में :1. बहुत ज्याआदा थकान2. बिना कोशिश के वजन में कमी3. मतली और भूख में कमी4. लीवर में वृद्धि 5. पेट के दाहिने हिस्सेइ में दर्द, पसली के नीचे (जहां आपका लीवर है)6. पीली त्वचा (पीलिया), डार्क यूरीन, और मिट्टी के रंग का मल मांसपेशियां में दर्द और बुखार शामिल है।उक्त लक्षणों मे से किसी भी प्रकार के लक्षण चिन्ह दिखाई देने पर चिकित्सालय मे अवश्य दिखाए।
*हेपेटाइटिस ई को रोकने के लिए क्या करें ?*
हेपेटाइटिस ई से बचने के लिए, गंदा पानी पीने के बारे में सतर्क रहना होगा।1. उबला हुआ पानी या शुद्ध पानी ही पिएं।2. कच्चेए या बिना छिले खाद्य पदार्थों से बचें।3. तुरंत पका हुआ ही भोजन खाएं।4. फल, सब्जियों और शैलफिश को पानी से धोकर ही इस्तेंमाल करें।5. शौच के बाद अपने हाथ साबुन से धो लें।6. स्वच्छता और हाथ धोना हेपेटाइटिस से बचने के लिए महत्वरपूर्ण है।
भोपाल भेजे गये थे कुछ सैंपल
टिमरनी
नगरीय क्षेत्र के वार्ड नम्बर 08, 09, 10 एवं 11 मे पीलिया के रोगी पाए गये हैं, जिनका उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मे किया जा रहा है । नगर के विभिन्न वार्डों से सेम्पल के तौर पर चार मरीजों के खून व मल के नमूने विशेष परीक्षण हेतु गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को भेजे गए थे। वहां से रिपोर्ट आने पर इन सभी मरीजों मे हेपेटाईटिस ई होने की पुष्टि की गई है।
स्वच्छता का रखे विशेष ध्यान
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ एम के चौरे ने बताया की हेपेटाईटिस-ई दूषित जल से होने वाला एक संक्रामक रोग है जो कि सावधानी बरतने पर सामान्य तौर पर २ से ३ सप्ताह मे ठीक हो जाता है। इस दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ख्याल रखना होगा. भोजन के पहले और शौच के बाद सही ढंग से हाथ धोना बहुत ज़रूरी है. असावधानी रखने से परिवार के अन्य सदस्य और आसपास के लोग भी रोग की चपेट मे आ सकते है।वर्तमान मे नगर के लगभग ४० मरीजों का उपचार चल रहा है. स्वास्थ्य विभाग और नगर पंचायत के संयुक्त प्रयासों से स्थिति अभी नियंत्रण मे है । स्वास्थ्य दल नियमित रूप से इन वार्डों मे सर्वेक्षण कार्य कर पीलिया के मरीजों को चिन्हित कर उन्हें चिकित्सालय भेज रहे हैं साथ ही वार्डवासियों को स्वास्थ्य शिक्षा देते हुए जागरूक भी कर रहे है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रदीप मोजेस के निर्देश अनुसार मरीजो की जांच परीक्षण व आवश्यक दवाओं की उपलब्धता टिमरनी चिकित्सालय मे सुनिश्चित की गई है।
*हेपेटाइटिस ई क्या है ?*
हेपेटाइटिस ई एक वायरस है, जो लीवर को संक्रमित करता है। हालांकि हेपेटाइटिस के अन्य रूपों के विपरीत, हेपेटाइटिस ई वायरस लंबे समय तक बीमारी या गंभीर लीवर की क्षति नहीं करता है, और अधिकांश लोग कुछ महीनों के भीतर ठीक भी हो जाते हैं। हेपेटाइटिस-ई लीवर की बीमारी है, जो हेपेटाइटिस ई वायरस (HEV) के कारण होता है ।
*हेपेटाइटिस ई कैसे फैलता है?*
हेपेटाइटिस ई एक जल जनित रोग है और इसके व्यापक प्रकोप का कारण दूषित पानी या भोजन की आपूर्ति है। प्रदूषित पानी इस महामारी को बढ़ा देता है।
*हेपेटाइटिस ई के लक्षण क्या है ?*
हेपेटाइटिस ई के लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते है। वायरस के संपर्क में आने के 2 से 7 सप्तााह के बाद ही कोई लक्षण दिखाई देता है। लक्षण आमतौर पर बाद के 2 महीनों में दिखाई देते हैं। आमतौर पर हेपेटाइटिस ई के लक्षणों में :1. बहुत ज्याआदा थकान2. बिना कोशिश के वजन में कमी3. मतली और भूख में कमी4. लीवर में वृद्धि 5. पेट के दाहिने हिस्सेइ में दर्द, पसली के नीचे (जहां आपका लीवर है)6. पीली त्वचा (पीलिया), डार्क यूरीन, और मिट्टी के रंग का मल मांसपेशियां में दर्द और बुखार शामिल है।उक्त लक्षणों मे से किसी भी प्रकार के लक्षण चिन्ह दिखाई देने पर चिकित्सालय मे अवश्य दिखाए।
*हेपेटाइटिस ई को रोकने के लिए क्या करें ?*
हेपेटाइटिस ई से बचने के लिए, गंदा पानी पीने के बारे में सतर्क रहना होगा।1. उबला हुआ पानी या शुद्ध पानी ही पिएं।2. कच्चेए या बिना छिले खाद्य पदार्थों से बचें।3. तुरंत पका हुआ ही भोजन खाएं।4. फल, सब्जियों और शैलफिश को पानी से धोकर ही इस्तेंमाल करें।5. शौच के बाद अपने हाथ साबुन से धो लें।6. स्वच्छता और हाथ धोना हेपेटाइटिस से बचने के लिए महत्वरपूर्ण है।
