सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव जरूरी- कलेक्टर श्री विश्वनाथन
वनांचल के उपस्वास्थ केन्द्रों का निरीक्षण किया कलेक्टर ने
सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव का होना बहुत जरूरी है। संस्थागत प्रसव का तात्पर्य चिकित्सा संस्थान में प्रशिक्षित और सक्षम स्वास्थ्य कर्मियों के पर्यवेक्षण में बच्चे को जन्म देना है। जहां स्थिति को संभालने और माता व शिशु के जीवन को बचाने के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध रहती है। कलेक्टर श्री विश्वनाथन ने आज जिले के वनांचल में स्थित डिलेवरी पाइन्ट ऊचाबरारी एवं बोरपानी उपस्वास्थ्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान घर पर होने वाले प्रसव को संस्थागत करने हेतु निर्देश दिए गए। श्री विश्वनाथन ने चंद्रखाल के आंगनवाड़ी केन्द्र का भी निरीक्षण किया। उन्होने निर्देशित किया कि आशा एवं एएनएम संभावित डिलेवरी डेट के पूर्व ही महिला को हाॅस्पीटल में भर्ती करावे। दोनों प्रसव केन्द्रों पर एक अतिरिक्त एएनएम की ड्यूटी डिलेवरी कराने हेतु लगाई गई। उन्होने निर्देशित किया कि इस कार्य में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी सहयोग करें। उल्लेखनीय है कि जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र टिमरनी अंतर्गत वन क्षेत्र के ग्राम बड़वानी अंतर्गत 2 हजार 9 सौ पचास जनसंख्या है जिसमें कुल सात ग्राम सम्मिलित है। बड़वानी अंतर्गत वर्ष में कुल 54 प्रसव हुए है, जिनमें से 17 प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है। 31 प्रतिशत प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है, बोथी अंतर्गत 2 हजार 7 सौ पचहत्तर जनसंख्या है, जिसमें कुल छः ग्राम सम्मिलित है। बोथी के अंतर्गत वर्ष में कुल 44 प्रसव हुए है, जिनमें से 22 प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है। 50 प्रतिशत प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है। राजाबरारी अंतर्गत 5 हजार 5 सौ पचहत्तर जनसंख्या क्षेत्र आता है, जिसमें कुल 5 ग्राम सम्मिलित है। राजाबरारी अंतर्गत वर्ष में 71 प्रसव हुए है, जिनमें से 26 घर पर सम्पन्न हुए है। 37 प्रतिशत प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है। बोरी अंतर्गत 3 हजार 1 सौ बयासी जनसंख्या क्षेत्र आता है, जिसमें कुल 4 ग्राम सम्मिलित है। कचनार अंतर्गत 3 हजार 6 सौ तेईस जनसंख्या क्षेत्र आता है, जिसमें कुल 4 ग्राम सम्मिलित है। कचनार अंतर्गत वर्ष में 33 प्रसव हुए है, जिनमें से 19 घर पर सम्पन्न हुए है। 58 प्रतिशत प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है। लाखादेह अंतर्गत 4 हजार 1 सौ पिचानवे जनसंख्या क्षेत्र आता है, जिसमें कुल 7 ग्राम सम्मिलित है। लाखादेह अंतर्गत वर्ष में 49 प्रसव हुए है, जिनमें से 38 घर पर सम्पन्न हुए है। 78 प्रतिशत प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है। बोरपानी अंतर्गत 7 हजार 2 सौ दो जनसंख्या क्षेत्र आता है, जिसमें कुल 10 ग्राम सम्मिलित है। बोरपानी अंतर्गत वर्ष में 70 प्रसव हुए है, जिनमें से 41 घर पर सम्पन्न हुए है। 59 प्रतिशत प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है। चन्द्रखाल अंतर्गत 6 हजार 9 सौ नब्बे जनसंख्या क्षेत्र आता है, जिसमें कुल 11 ग्राम सम्मिलित है। चन्द्रखाल अंतर्गत वर्ष में 148 प्रसव हुए है, जिनमें से 121 घर पर सम्पन्न हुए है। 82 प्रतिशत प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है। इसी प्रकार लोधीढाना अंतर्गत 4 हजार 5 सौ सत्तर जनसंख्या क्षेत्र आता है, जिसमें कुल 4 ग्राम सम्मिलित है। लोधीढाना अंतर्गत वर्ष में 74 प्रसव हुए है, जिनमें से 49 घर पर सम्पन्न हुए है। 66 प्रतिशत प्रसव घर पर सम्पन्न हुए है।ज्ञात रहे कि गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा संस्थाओं में प्रसव कराने पर ग्रामीण क्षेत्र में गर्भवती महिला के साथ आई प्रेरक को 600 रुपए की राशि दी जाती है। संबल योजना में दो बच्चों तक के जन्म पर 16 हजार रूपए दिए जाते हैं। वनग्राम ऊंचाबरारी और बोरपानी में भी जननी एक्सप्रेस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।इसके साथ ही संस्थागत प्रसव, मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए परिवहन एवं उपचार योजना भी है।
शिशु के समग्र स्वास्थ्य की स्थिति में वृद्धि
घरेलू प्रसव की तुलना में अस्पतालों में प्रसव कराने से जच्चा-बच्चा दोनों की अच्छी तरह से देखभाल की जाती है। अगर बच्चा घर पर पैदा होता है, तो अस्पष्ट वातावरण से संक्रमित होने की संभावना अधिक होती है और यह नवजात के जन्म की जटिलताओं को संभालने में बहुत कठिन और कभी-कभी असंभव हो सकता है। संस्थागत प्रसव के परिणामस्वरूप शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है वहीं माता और शिशु के समग्र स्वास्थ्य की स्थिति में वृद्धि भी की जा सकती है।
शिशु के समग्र स्वास्थ्य की स्थिति में वृद्धि
घरेलू प्रसव की तुलना में अस्पतालों में प्रसव कराने से जच्चा-बच्चा दोनों की अच्छी तरह से देखभाल की जाती है। अगर बच्चा घर पर पैदा होता है, तो अस्पष्ट वातावरण से संक्रमित होने की संभावना अधिक होती है और यह नवजात के जन्म की जटिलताओं को संभालने में बहुत कठिन और कभी-कभी असंभव हो सकता है। संस्थागत प्रसव के परिणामस्वरूप शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है वहीं माता और शिशु के समग्र स्वास्थ्य की स्थिति में वृद्धि भी की जा सकती है।
