*बच्चे बोले मेरा भी तो अधिकार हैं*
14 नवम्बर पूरे देश में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता हैं शेडो संस्था पूरे ज़िले में बाल अधिकार के मुद्दों पर विगत 5 सालों से कार्य कर रही है जिसमें संस्था ज़िले में शाला त्यागी बच्चों और भिक्षाव्रत्ति करने बाले बच्चों मनोरंजक तरीक़े से शिक्षा देकर स्कूल से जोड़ने के साथ मुख्य धारा में जोड़ रही है और बच्चों को सम्मान दिला रही है । संस्था 14 नवम्बर से 20 नवम्बर तक पूरे सप्ताह को बाल अधिकार जागरुकता सप्ताह के रूप में विगत चार वर्षों से मनाते आ रही है। संस्था की साथी कविता सोनकिया ने बताया कि प्रति वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी बाल अधिकार सप्ताह के पहले दिन का प्रोग्राम संस्था के तालीम और शानदार शनिवार के अंतर्गत भिक्षाव्रत्ति करने बाले बच्चे और स्कूली बच्चों के साथ *बच्चों के अधिकारो पर सांस्क्रतिक गतिविधि* के रूप में मनाया गया जो बघवाड ग्राम की शासकीय प्राथमिक शाला में किया गया जिसमें बच्चों को टेडी वियर का खेल "इसका क्या अधिकार है" खिलाया और खेल खिलाए। संस्था से अंशुल सिंह सिकरवार, दिव्या, मिनी, अपेक्षा, निर्मल, मिहिर, लवकुश और नर्मदा प्रसाद लोवंशी, अब्बास शाह , कोमल अग्रवाल, रेखा मेडम और स्कूल के अन्य शिक्षक उपस्थित थे जिन्होंने बच्चों को गीत सुनाए। संस्था के साथी मधुर ने आगे जानकारी देते हुए बताया की इसी तरह अगले छः दिन में बच्चों के अधिकार और POCSO ऐक्ट पर शहर और गाँव की स्कूलों में कार्यशाला, बैंक में बाहरी भ्रमण, चित्रकारी गतिविधि और स्कूलों के बच्चों को अधिकारो और पोकसो ऐक्ट पर कोमल फ़िल्म दिखाई जाएगी तथा 20 नवम्बर को जागरुकता कार्यक्रम " सहभागिता का मेला " के रूप में मनाया जाएगा ।
बच्चों के अधिकारो पर सांस्क्रतिक गतिविधि
नवंबर 14, 2018
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