नोबल कोरोना वायरस से बचाव एवं आयुष चिकित्सा पद्धति के उपाय

त्रिमूर्ति न्यूज दीपक यादव
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नोबल कोरोना वायरस से बचाव एवं आयुष चिकित्सा पद्धति के उपा


आयुष प्रणाली पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों पर आधारित है। देश की पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए उचित जीवनशैली की तरफदारी करती है। प्रतिरक्षा विभिन्न प्रकार के संक्रामक रोगों की रोकथाम में मदद करती है। हाल ही में कोरोना वायरस का प्रकोप देखा गया है, जो मुख्य रूप से श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। आयुष मंत्रालय निवारक उपाय के रूप में परामर्श जारी कर रहा है। आयुष मंत्रालय के तहत अनुसंधान परिषदें विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य गतिविधियों में शामिल हैं और आम जनता के लिए समय-समय पर जीवनशैली की तरफदारी उपलब्ध कराती हैं।
बचाव एवं आयुर्वेद, होम्योपैथिक, युनानी चिकित्सा पद्धति के उपाय
    दिन में कई बार साबुन से हाथ धुलें, हाथों से आंख, नाक और मुंह को बार-बार न छुएं, शरीर की इम्युनिटी को बरकरार करने वाली चीजों का सेवन करें, खांसते और छींकते समयअपने मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढक कर रखें, खांसी, बुखार और जुकाम के लक्षण होते ही डॉक्टर के पास जाएं, सांस की तकलीफ से ग्रसित मरीज के पास जाने से बचें, नियमित रूप से साफ-सफाई का ध्यान दें. इसके साथ ही मास्क  और दस्ताने को इस्तेमाल में लाएं,खांसी बुखार के वक्त यात्रा से परहेज करें।
    आयुर्वेदिक पद्धतियों के अनुसार निवारक प्रबंधन उपाय सुझाए गए हैं। जिनमें शदांग पानिया (मस्टा, परपट, उशीर, चंदन, उडीच्या और नागर) संसाधित पानी (1 लीटर पानी में 10 ग्राम पाउडर डालकर तब तक उबालें जब तक  यह आधा हो जाए) पीए। इस पानी को एक बोतल में भर लें और प्यास लगने पर पी लें। आयुर्वेदिक पद्धतियों के अनुसार रोगनिरोधी उपाय/इम्यूनोमॉड्यूलेटरी दवाइयां। स्वस्थ आहार और जीवनशैली पद्धतियों के माध्यम से प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उपाय किए जाएं। अगस्त्य हरितकी 5 ग्राम, दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें। समशामणि वटी 500 मिलीग्राम दिन में दो बार लें। त्रिकटु (पिप्पली, मारीच और शुंठी) पाउडर 5 ग्राम और तुलसी 3 से 5 पत्तियॉं एक लीटर पानी में तब तक उबाले,  जब तक पानी आधा लीटर न रह जाएं। इस पानी को एक बोतल में भर लें और आवश्यकतानुसार धीरे-धीरे पीएं। प्रतिमर्षा नस्यः अनुतैल/तिल तेल की दो-दो बूंद प्रत्येक नथुने में प्रतिदिन सुबह लगाएं।
होम्योपैथी पद्धतियों के अनुसार निवारक प्रबंधन कदम उठाने का सुझाव
     विशेषज्ञों के समूह ने परस्पर यह सिफारिश की है कि होम्योपैथी दवा आर्सेनिकम एल्बम 30 संभावित कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ रोगनिरोधी दवा के रूप में ली जा सकती है। इसे आईएलआई की रोकथाम में भी लेने की सलाह दी गई है। आर्सेनिकम एल्बम 30 की एक खुराक तीन दिनों तक रोजाना खाली पेट लेने की भी सलाह दी गई है। अगर समुदाय में कोरोना वायरस का संक्रमण मौजूद हो, तो यह खुराक एक महीने के बाद दोहरायी जानी चाहिए।
    यूनानी प्रथाओं के अनुसार निवारक प्रबंधन कदम सुझाए गए हैं। जिनमें बेहिदाना  (सिदोनिया ओबलोंगा) 3 ग्राम, उनाब जिजिफस (जुज्यूब लिन) 5 नग, सैपिस्तां (कॉर्डिया माइक्सा लिन) 7 नग को 1 लीटर पानी में आधा होने तक उबालकर काढ़ा तैयार करें। इसे बोतल में भरकर आवश्यकता पड़ने पर धीरे-धीरे पीएं। रोगनिरोधी उपायों के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को इस उद्देश्य के लिए मजबूत बनाने की जरूरत है। खमीरा मार्वेरीड 3 से 5 ग्राम रोजाना लें। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी शासकीय चिकित्सालय, औषधालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, पर संपर्क करें। नोबल कोरोना वायरस से अनावश्यक डरने की आवश्यकता नहीं है। सावधानी एवं सतर्कता से बचाव आसान है।

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